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U.P. Reorganisation Act-2000

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 उ०प्र० पुनर्गठन समन्वय विभाग में भारत सरकार द्वारा उ०प्र० पुनर्गठन अधिनियम-२००० के प्राविधानों के अनुसार उ०प्र० तथा उत्तरांचल के मध्य परिसम्पित्तियों एवं कार्मिकों के बंटवारे का कार्य किया जाता है ।

उ०प्र० तथा उत्तरांचल राज्य के मध्य पदों के विभाजन तथा कार्मिकों के लिए उ०प्र० पुनर्गठन अधिनियम-२००० की धारा-७६ के अर्न्तगत भारत सरकार द्वारा अपनी सहायता के लिए राज्य परामर्शीय समिति का गठन किया गया है । इस समिति का मुख्य कार्य दोनों राज्यों के मध्य राज्य सेवा संवर्ग के पदों का विभाजन करने के उपरान्त शासनादेश सं०-९१५/२८-२-२००२ दिनांक १५-७-२००२ में निहित व्यवस्था एवं मापदण्ड के अनुसार यथा विकल्पधारी मूल निवासी एवं कनिष्ठतम कार्मिकों को टेन्टेटिव अंतिम आवंटन सूची तैयार किया जाना है । इसके पश्चात टेन्टेटिव अंतिम आवंटन सूची को संबंधित कार्मिकों के मध्य इस आशय से परिचालित किया जाता है कि यदि प्रभावित कार्मिक राज्य आवंटन के विरूद्ध कोई प्रत्यावेदन देना चाहे तो वह उसे नियत अवधि तक दे सकता है । राज्य परामर्शीय समिति द्वारा कार्मिकों के प्रत्यावेदन पर विभागीय संस्तुति प्राप्त करने के उपरान्त उन पर गुणावगुंण के आधार पर विचार कर संस्तुति भारत सरकार को उपलब्ध कराये जाने की व्यवस्था भारत सरकार द्वारा जारी गाइड लाइन्स में की गयी है । उसके उपरान्त भारत सरकार द्वारा उ०प्र० पुनर्गठन अधिनियम-२००० की धारा-७३ (२) के अर्न्तगत कार्मिकों के उ०प्र० अथवा उत्तरांचल राज्य को अंतिम आवंटन आदेश जारी किये जाने की व्यवस्था है।

 

 

 

 

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